तेरे दर को छोड़कर किस दर जाऊँ मैं Tere Dar Ko Chod Kis Dar Jaun Main

 तेरे दर को छोड़कर किस दर जाऊँ मैं Tere Dar Ko Chod Kis Dar Jaun Main

 Tere Dar Ko Chod Kis Dar Jaun Main

 

तेरे दर को छोड़कर किस दर जाऊँ मैं,

सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊँ मैं।

जब से याद भुलाई तेरी लाखों कष्ट उठाएं है,

क्या जानूँ इस जीवन अंदर कितने पाप कमाए हैं।

हूं शर्मिंदा आपसे क्या बतलाऊं मैं ॥तेरे.॥

मेरे पाप कर्म ही तुझसे प्रीति न करने देते हैं,

कभी जो चाहूं मिलू आपको रोक मुझे ये लेते हैं,

कैसे स्वामी आपके दर्शन पाउं मैं ॥तेरे.॥

है तू नाथ! वरों का दाता, तुझसे सब वर पाते हैं,

ऋषि, मुनि और योगी सारे तेरे ही गुण गाते हैं,

छींटा दे दो ज्ञान का, होश में आऊं मैं ॥तेरे.॥

जो बीती सो बीती लेकिन बाकी उमर सँभालू मैं,

प्रेमपास में बंधा आपके गीत प्रेम के गालूं मैं,

जीवन प्यारे ‘देश’ का सफल बनाऊँ मैं ॥तेरे.॥

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