तेनालीराम और गुप्तचर tenali raman stories in hindi

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तेनालीराम और गुप्तचर : Tenaliram ki hindi kahaniya –महाराजा कृष्णदेव राय के दरबार मे एक चमत्कारी बाबा हाजिर हुए। उन्होने महाराज की तारीफ मे ऐसे पुल बाँधे कि महाराज उसके दीवाने हो गए। 
 
कुछ दिनो पश्चात महाराज ने तेनाली से कहा – तेनाली, आज हमे एक ऐसी जगह ले चलों जहाँ हम पहले कभी नहीं गए। ‘महाराज ऐसी जगह तो मैं भी आपको ले जाना चाहता था। अच्छा हुआ जो आपने ही इच्छा प्रकट कर दी। लेकिन हमें ऐसी जगह पूरी सेना के साथ जाना होगा।“ तेनाली ने कहा | ‘सेना के साथ! महाराजा ने चौंक कर पूछा। जी महाराज! वो जगह ही ऐसी है, तेनाली बोला।
तेनालीराम और गुप्तचर

तेनालीराम और गुप्तचर

तो ठीक है, कल हम सेना सहित भ्रमण पर चलेंगे। कृष्णदेव ने सेनापति को आदेश दे दिया। अगली सुबह तेनाली और सेना सहित महाराजा अपने सुसज्जित रथ में भ्रमण को निकल पड़े। आज तेनाली उन्हें नए-नए रास्तो से लेकर जा रहा था। ये सब देख कर महाराजा कृष्णदेव बहुत प्रसन्न हो रहे थे। हरे-भरे जंगलों से होता हुआ काफिला पहाड़ी रस्तों पर आ गया। 
 
तभी तेनाली ने गुफा पर बने एक पत्थर को लोहे की छड़ी से ठोका। थोड़ी देर बाद वो पत्थर सरका और एक बाबा बाहर निकला। उसे देखते ही महाराजा चौंक पड़े। अरे ये तो वही चमत्कारी बाबा हैं जो कुछ दिन पहले हमारे महल मे आए थे। ये यहाँ क्या कर रहे हैं?
 
“ये चमत्कारी बाबा नहीं, बल्कि पड़ोसी देश के जासूस हैं। यहाँ इस गुफा में इन्होंने भरी सेना इकट्टी कर रखी है। जब यह दरबार में आपकी तारीफ करके निकला तो इसकी हकीकत जानने के लिए मैंने गुप्तचर इसके पीछे लगा दिए। इस छुपी हुई सेना से यह हमारे राज्य पर आक्रमण करने की ताक में था।’’ तेनाली ने विस्तार से बताया। 
 
महाराजा के आदेश पर सैनिकों ने उस गुफा में छिपी सेना को कैद कर लिया। महाराजा कृष्णदेव राय ने तेनाली का आभार जताते हुए उसे अपने गले लगा लिया और राजमहल लौट आए।  

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