संवरिया ले चल परली पार Sanvariya Le Chal Parli Paar

 संवरिया ले चल परली पार Sanvariya Le Chal Parli Paar

संवरिया ले चल परली पार Sanvariya Le Chal Parli Paar

संवरिया ले चल परली पार, संवरिया ले चल परली पार,

जहां विराजे राधा रानी, अलबेली सरकार, संवरिया ले चल…..

गुण अवगुण सब तेरे अर्पण, बुद्धि सहित मन तेरे अर्पण,

ये जीवन भी तेरे अर्पण, पाप, पुण्य सब तेरे अर्पण,

मैं तेरे चरणों की दासी, मेरे प्राण आधार, संवरिया ले चल…..

तेरी आस लगा बैठी हूं, लज्जा शील गवां बैठी हूं,

रो-रो नैन पका बैठी हूं, अपना सर्वस्व लुटा बैठी हूं,

अखियाँ खूब थका बैठी हूं, अपना आप लुटा बैठी हूं,

सांवरिये मैं तेरी रागिनी, तू मेरा मल्हार॥ संवरिया ले चल…..

तेरे बिना कुछ चाह नहीं है, जीने की कोई परवाह नहीं है,

कोई सूजती राह नहीं है, तेरे बिना कुछ चाह नहीं है,

मेरे प्रीतम मेरे मांझी, करदो नैया पार॥ संवरिया ले चल…..

आंगन आनंद बरस रहा है, पत्ता-पत्ता हर्ष रहा है,

पीह-पीह कह कोई तरस रहा है, हरि विचारा तरस रहा है,

बहुत हुई अब हार गई मैं, क्यों छोड़ी मझधार॥ संवरिया ले चल…..

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