मेरे दाता के दरबार में Mere Data Ke Darbaar mein Lyrics mp3

 मेरे दाता के दरबार में Mere Data Ke Darbaar mein

मेरे दाता के दरबार में Mere Data Ke Darbaar mein

मेरे दाता के दरबार में, सब लोगो का खाता।

जो कोई जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

क्या साधू क्या संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी।

प्रभु की पुस्तक में लिखी है, सब की कर्म कहानी।

वही सबके कर्म है लिखता, सही हिसाब लगाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

बड़े-बड़े कानून प्रभु के, बड़ी-बड़ी मर्यादा।

किसी को कौड़ी कम नही देता, न ही देता ज्यादा।

समझदार तो चुप है रहता, मूरख शोर मचाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

चले न उसमे रिश्वत खोरी, चले नहीं चालाकी।

उसके लेन-देन में बंदे, फरक रहे न बाकी।

जो कोई जैसा कर्म है करता, वैसा ही फल पाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

करता वह इंसाफ सभी, ऊंचे आसन चढ़ के।

उसका फैसला कभी न बदले, लाख कोई सिर पटके।

धर्म का बेड़ा पार करे वो, पाप की नाव डूबाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

अच्छी करनी कर ले बंदे, कर्म न करिओ काला।

लाख आंख से देख रहा वह, तुझे देखने वाला।

उसकी नजर है इतनी पैनी, कोई नही बच पाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

कर्म की खेती बड़ी विचित्र, लीला उसकी न्यारी।

माया का ऐसा जाल बिछाया, समझे नही अनाड़ी।

निष्काम कर्म कर चतुर नर, पार उतर है जाता॥ मेरे दाता के दरबार में……

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