भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध Short Paragraph Indian National Flag hindi Essay

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध : Indian national flag Information and Details in Hindi

Indian National Flag colours founder size rule Essay in hindi : भारत का राष्ट्रीय ध्वज़ देश की शान, गौरव और सम्मान का प्रतीक है जो की भारत के सभी राष्ट्रीय प्रतीकों मे सबसे ज्यादा माने जाने वाला (सबसे जयदा काम मे आने वाला) प्रतिक है | भारत का राष्ट्रीय ध्वज़ तीन रंगो से मिलकर बनता है इसलिए इसको तिरंगा भी कहते है | राष्ट्रीय ध्वज़ भारत की आज़ादी की लम्बी लड़ाई, आज़ाद लोकतंत्र एवं सविंधान को दर्शाता है इसलिए ही हम सभी की यह जिम्मेदारी बनती है की इसकी शान को जाने या अनजाने मे किसी भी तरह से चोट न पहुँचाये|

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राष्ट्रीय ध्वज़ का रंग व् आकार : भारतीय के राष्ट्रीय ध्वज मे तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां होती हैं – सबसे ऊपर केसरिया उसके बाद सफेद फिर सबसे निचे गहरे हरे रंग की पट्टी होती है इन तीनों रंगो का आकार समान अनुपात मे होता है । राष्ट्रीय ध्वज की चौड़ाई व् लंबाई का अनुपात 2:3 मे होना चाइये इसका मतलब लम्बाई, चौड़ाई की तुलना मे 1.5 गुना ज्यादा होनी चाहिए | बिच के सफेद रंग वाली पट्टी के बीचो बिच गहरे नीले रंग का एक चक्र होता है जिसे धर्म चक्र या अशोक चक्र कहा जाता है इस चक्र मे 24 तीलियां या शलाकाएं होती है | चक्र में 24 तीलियों इस बात को दर्शाती है की दिन व् रात्रि के सभी 24 घंटे जीवन गति‍शील होता है और कभी नहीं रुकना चाहिए इसके रुकने का अर्थ है जीवन की समाप्ति या मृत्यु | 

राष्ट्रीय ध्वज मे बताये गए सभी रंगो का अपना महत्त्व है | केसरिया रंग बलिदान, उत्साह, एकता और वीरता का परिचायक है, सफ़ेद रंग शांति का एवं हरा रंग विश्वास, सम्पत्रता और समृद्धि को दर्शाता है | 

राष्ट्रीय ध्वज़ का इतिहास : आज़ादी से पहले बहुत सालो तक भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ के अलग अलग स्वरुप सामने आते रहे लेकिन अंतिम व् आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रीय ध्वज़, संविधान सभा के सम्मेलन मे 22 July 1947 को पास किया गया एवं 15 august 1947 को संविधान सभा के द्वारा पास किये गए ध्वज़ को भारत का राष्ट्रीय ध्वज़ घोषित कर दिया गया  | राष्ट्रीय ध्वज़ को बनाने का श्रेय पिंगली वेंकैया को जाता है | पिंगली वेंकैया ने भारत की आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी | वे आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे | 

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भारतीय ध्वज संहिता तिरंगा फहराने के नियम  : 

  1. कभी भी ख़राब या झतिग्रस्त ध्वज को नहीं फहराना चाहिए | 
  2. ध्वज को कभी भी किसी भी सजावट के काम मे नहीं लेना चाहिए | 
  3. हमेशा तिरंगे का साइज 3:2 के अनुपात मे होना चाहिए | 
  4. ध्वज पर किसी भी प्रकार से कुछ और लिखा जाना या बनाना मना है |
  5. राष्टीय शोक दिवस पर ध्वज को आधा झुका हुआ होना चाहिए 
  6. किसी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय झंडे से ऊपर या बराबर नहीं लगाना चाहिए | 
  7. कोई भी भारतीय नागरिक ध्वज को फहरा सकता है | 
  8.  ध्वज को सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है।   
  9. ध्वज का पोल इमारत के सबसे ऊंचे वाले हिस्से मे होना चाहिए | 
  10. प्राइवेट इंस्टीटूशन्स सभी सामान्य दिन ध्वज को फहरा सकते है लेकिन पुरे सम्मान, कायदे व् नियम के अनुसार | 
  11.  सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए केवल कुछ विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है 
  12.  सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए केवल कुछ विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है | 
  13. झंडे को किसी गाड़ी, नाव या हवाई जहाज के पीछे नहीं लगाया जाना चाहिए |
  14. झंडे का प्रयोग किसी भी सामान को या किसी इमारत को ढकने के लिए नहीं करना चाहिए | 
  15. हमेशा कॉटन, खादी या सिल्क का होना चाहिए | झंडे को बनाने के लिए प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिए | 

भारत के राष्टीय ध्वज के बारे मे विस्तार से जानने के लिए सरकारी नोटिफिकेशन पर जाये और PDF Download करे या ऑनलाइन भी रीड कर सकते है | Click here to read notification | 

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