अरे कोई कारण होगा Are Koi Karan Hoga

अरे कोई कारण होगा Are Koi Karan Hoga

अरे कोई कारण होगा Are Koi Karan Hoga

इक झोली में फूल खिले हैं, इक झोली में कांटे॥ अरे कोई कारण होगा

तेरे बस में कुछ भी नहीं, वह तो बांटने वाला बाटै॥ अरे कोई कारण होगा

पहले बनती हैं तकदीरें, फिर बनता है शरीर।

यही प्रभु की करिगिरी है, तू क्यों हुआ गंभीर॥ अरे कोई कारण होगा

नाग भी डस ले तो मिल जाए, किसी को जीवन दान।

चींटी से भी मिट सकता है, किसी का नामो निशान॥ अरे कोई कारण होगा

धन से विस्तर मिल जाए, पर नींद को तरसे नैन।

कांटो पर भी सोकर आए, किसी के मन को चैन॥ अरे कोई कारण होगा

सागर से भी बुझती नहीं, कभी किसी की प्यास।

कभी तो एक बूंद से हो जाती, पूर्ण मन की आस॥ अरे कोई कारण होगा

“शुभ कर्म अनुसार फूल खिले, दुष्कर्म अनुसार कांटे,

भैया दुष्कर्म अनुसार कांटे,

जैसे तूने कर्म किए, वैसा ही फल बांटै,

हां-हां वैसा ही फल बांटै,

यही कारण होगा, हां- हां यही कारण होगा,

यही कारण होगा।

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