स्कूल का पहला दिन और मेरा वो दोस्त : दिल की बात रानी आहूजा

पता नहीं कैसा लग रहा था लेकिन कुछ अजीब से फीलिंग थी। नया शहर, नए पडोसी, नया स्कूल, नए टीचर्स और कुछ नया अहसास था ये। जब सुबह मम्मी ने आवाज लगायी और कहा रानी स्कूल का टाइम हो रहा है उठ जाओ तो वही आलस और एक अजीब सा डर। यह डर था नए लोगो का और वैसे भी सभी मुझे बोलते है की मे जल्दी से किसी से मिक्स नहीं होती हूँ और मुझे दोस्त बनाने मे टाइम भी बहुत लगता है।

dil ki baat

dil ki baat

मैं तो बस ऐसी ही हूँ, वैसे भी पहले जिस शहर मे हम थे वहाँ पर भी मेरी केवल एक ही दोस्त थी रचना। पता नहीं क्यों मे रचना के आलावा किसी और के साथ बात नहीं कर पाती थी या कहो मेरा मन नहीं करता था और ये तो नया स्कूल है एक अजीब सा डर था की यहाँ पर कैसे किसी से बात करुँगी और अगर किसी से दोस्ती नहीं हुई तो क्या मे अकेले बैठे रहूंगी या फिर अगर मैंने किसी से बात करने की कोशिश की और किसी ने मुझसे बात नहीं की तो कही मेरी बेइज्जती न हो जाये और पता नहीं क्या क्या विचार थे दिमाग मे।

ये सभी बाते सोचते सोचते पता नहीं कब स्कूल के लिए तैयार होकर मम्मी को bye बोलकर स्कूल के लिए निकलने लगी तो मम्मी ने चिल्लाकर कहा – ये भगवान् – पता नहीं इस लड़की का ध्यान कहा है आज स्कूल का पहला दिन है कम से कम भगवान् के हाथ तो जोड़ ले तो और ये सुनकर – मैं जल्दी जल्दी पूजा घर जा कर भगवान् के हाथ जोड़ कर मन ही मन बोली – हे भगवान् मेरा कोई अच्छा दोस्त बनवा देना और फिर स्कूल के लिए पैदल ही निकल गयी। वैसे तो स्कूल घर से जयदा दूर नहीं था लेकिन मेरी सोच और चिंता ने कम दुरी को ओर भी कम कर दिया और सोचते सोचते पता ही नहीं चला कब स्कूल पहुंच गयी। जैसे ही स्कूल के गेट मे एंटर हो रही तो एक लड़का बहुत तेजी से भागते हुए मेरे से टकरा गया और जैसे की आदत है बिना उसे देखे बस सॉरी कह दिया क्योकि मझे लगा की मेरी गलती होगी और बिना उसकी शक्ल देखे आगे बढ़ गयी ।

थोड़ा ही आगे बड़ी थी की पीछे से आवाज आयी – हे रुको और मेरा ध्यान टुटा और मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वही लड़का मझे घूर कर देख रहा था और उसके हाथ मे मेरा ID कार्ड था। उसने कहा सॉरी बोलते वक़्त कुछ सॉरी की फीलिंग भी थी या बस ऐसे ही बिना देखे बोल दिया – ये ID कार्ड तुम्हारा ही है न –इस पर रानी आहूजा, 9C लिखा है? उसकी कड़कती आवाज सुनकर मे घबराते हुए बोली सॉरी मेरा ध्यान कही ओर था और उस लड़के से जल्दी से कार्ड लिया और फिर अपनी धुन मे आगे बढ़ गयी ।

फिर अपनी क्लास ढूंढ़ते हुए पहुंची तो देखा की क्लास मे आगे की कोई भी सीट खाली नहीं है और आगे की क्या बाकी दूसरी ज्यादातर सीट पर पहले से स्टूडेंट्स बैठे थे या फिर उनके बेग रखे हुए थे बस केवल लास्ट बेंच की दो सीट थी जिस पर कोई नहीं था। मैंने धीरे से लास्ट बेंच पर जा कर अपना बेग रखा और बैठ गयी। क्लास के सभी बच्चे आपस मे बात कर रहे थे और कुछ स्टूडेंट्स अपना बेग निकालकर कुछ न कुछ काम कर रहे थे। मैंने अपने पास वाली बेंच पर बैठी लड़की से हिम्मत करके बात की और कहा ही मेरा नाम रानी है और आपका नाम क्या है उसने जयदा भाव न देते हुए कहा अनीता और फिर अपने काम मे लग गयी। मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन क्या करती, मैं भी अपने बेग से बुक निकालकर पढ़ने का नाटक करने लगी जिससे सभी को लगे की मे भी किसी काम मे बिजी हूँ ।           

थोड़ी देर मे मेरे पास की सीट पर (जो की खाली थी) वही लड़का आ कर बैठ गया जो की बाहर मेरे से टकराया था। मेरी तो उसकी तरफ देखने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी लेकिन वो ही मेरे से बोला – what’s a surprise – Hi मेरा नाम निखिल है। पहले तो उसको देखकर कुछ झिझकी और फिर एक अजीब से खुशी महसूस हुई ऐसा लगा की कोई अपना हो जबकि मे तो उसको जानती ही नहीं थी। लेकिन लगा की चलो कोई तो है जो बात कर रहा है नहीं तो बहुत देर से क्लास मे ऐसे बैठ थी जैसे की चारो तरफ शेर है और मेरा अब शिकार होने वाला है। निखिल बात करने मे बहुत ही चंचल स्वाभाव का था और उसके विपरीत मैं कम बोलने वाली और रीजर्व नेचर की लेकिन उससे बात करके मेरा आत्म विश्वास बढ़ गया था ।

उस दिन मेरी निखिल से अच्छी दोस्ती हो गयी और उसने ही मुझे अपने सारे फ्रेंड्स से मिलवाया और लंच टाइम मे मैंने निखिल और उसके फ्रेंड्स के साथ ही खाना खाया। निखिल इतना बोलता था की उसकी बाते ही खत्म नहीं हो रहे थी और मेरे पास पूछने को और बोलने को कुछ नहीं था। मैं जानती थी की मे बहुत बोरिंग हूँ लेकिन उसका मैं क्या करू| उस दिन जब छुट्टी मे स्कूल से घर लौट रही तो मेरे चेहरे पर एक अजीब sa कॉन्फिडेंस था और जो शहर और स्कूल सुबह तक अजनबी थे अब सब कुछ अपना सा लग रहा था। मे सोच रही थी की अगर निखिल क्लास मे नहीं होता तो ये होता या वो होता । यहाँ पर मे ये बताना चाहूंगी की निखिल आज मेरा लाइफ पार्टर है और उस दिन के छोटे से एक्सीडेंट ने हमको जिंदगी भर के लिए साथ मिला दिया।

यहाँ पर मैंने अपनी जिंदगी का एक छोटा सा हिस्सा शेयर किया है क्योकि जब मझे पता लगा की “अच्छाज्ञान.Com” पर “दिल की बात” के नाम से नया सेक्शन शुरू हो रहा है तो मझसे रहा नहीं गया और मैंने सोचा की अपनी लाइफ की एक छोटी सी कहानी आपसे शेयर की जाए|   

ये लाइफ की छोटी सी कहानी बताने के लिए मैंने जब निखिल (जो की अब मेरे हस्बैंड है) से पूछा तो उन्होंने कहा क्या बात है बहुत अच्छा। अगर तुम लिख सकते हो तो इससे अच्छी बात कोई और न होगी। ये मेरा पहला पोस्ट था और मझे ये भी नहीं पता की अच्चाज्ञान वेबसाइट इसको पोस्ट भी करेगी या नहीं। अगर ये पोस्ट बिना किसी काट छांट के approve हो जाता है तो प्लीज मेरे पोस्ट पर कमेंट करके बताये के कैसा लगा। आपके अच्छे अच्छे कमैंट्स से मुझे आगे अपनी दिल की बात शेयर करने मे हिम्मत मिलेगी और शायद मे आपसे निखिल और हमारी दोस्त कैसे प्यार मे और फिर शादी मे बदली आसानी से बता पाऊँगी। इसके लिए आपको थोड़ा इंतजार करना होगा 

थैंक्स अच्चाज्ञान

रानी आहूजा

भोपाल

Read Also – मुझे सिर्फ बेटा चाहिए real life story shared by Sunita Barot

4 Comments

  1. Anchal November 22, 2017
  2. sunita November 23, 2017
  3. Anil November 24, 2017
  4. vijeta November 24, 2017

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